Ads

“उनके पंख एक दूसरे से परस्पर मिले हुए थे; वे अपने अपने साम्हने सीधे ही चलते हुए मुड़ते नहीं थे।” (येहजकेल १: ९)


 “उनके पंख एक दूसरे से परस्पर मिले हुए थे; वे अपने अपने साम्हने सीधे ही चलते हुए मुड़ते नहीं थे।” (येहजकेल १: ९)



      पंख स्वतंत्र गति को सूचित करते हैं। परमेश्वरने हमको भी आत्मिक पंखे दी है जिससे उसके साथ एक होकर परमेश्वर की पूरी दुनिया में स्वतंत्र होकर उड़ सकें।


      जब हम मसीही जीवन की शुरुआत करते हैं तब हम अपने विषय में और हमारे निकट के परिवार जनों के विषय में विचार करते हैं। परन्तु जैसे जैसे आत्मा में वृद्धि पाते हैं वैसे वैसे हम दूसरों के विषय में विचार करते हैं; धीरे धीरे हमारे विचार पूरे विश्व में फिरते हुए मालूम पड़ते हैं। बाद में हममें यह जानने की उत्सुकता जागती है कि इस दुनिया का अंत आने के पश्चात परमेश्वर क्या करनेवाला है। हमारा मन स्वर्ग का, आनेवाली नई सृष्टि का विचार करने लगता है। जैसे जैसे हम आत्मिक वृद्धि पाते हैं, वैसे वैसे यह बनता है, और इसलिये शैतान हमको संसार की, टल जाने वाली वस्तुओं में मशगूल रखनेका यत्न करता है। परमेश्वर का उद्देश्य यह है कि हम मानवीय विचारों की मर्यादा में न रहें। करूब पंखो के सहारे परमेश्वर का उद्देश्य पूर्ण करने के लिये विश्व में कहीं भी जा सकते थे। और इसी रीति से हमें परमेश्वर के आधीन होना है। इस प्रकार मण्डली द्वारा हरेक स्थल में परमेश्वर का स्वर्गीय उद्देश्य पूरा होगा।


      इन चारों जीवधारियों के पंख एक दूसरे के साथ जुड़ी हुई थी। इसका अर्थ यह है कि जहाँ एक जीवधारी जाये वहाँ दूसरे तीनों को भी उसके पीछे जाना पडे़। वह सच्ची आत्मिक एकता को दर्शाता है। वे स्वतंत्र रीति से अपनी इच्छानुसार खुद की दिशा में नहीं जा सकते थे। मसीह की कलीसिया को इसी रीति से व्यवहार करना है। परमेश्वर की सेवा में हम मन मर्जी बात या व्यवहार नहीं कर सकते। जैसे जैसे हम परमेश्वर की मंडली के विषय का सम्पूर्ण उद्देश्य समझते हैं, वैसे वैसे हमें यह ज्ञात होता है कि हम स्वतंत्र रीति से व्यवहार नहीं कर सकतें। परन्तु साथी विश्वासियों और सहकर्मियों जिनके साथ जीवन बिताने और जिम्मेदारी में भाग लेने के लिये बुलाये गये हैं उनकी पूर्ण संगति में ही व्यवहार कर सकते हैं। परमेश्वर हमसे आत्मिक एकता चाहता हैं।


      जैसे जैसे आप आत्मा में बढ़ते जाये, वैसे वैसे परमेश्वर के सहकर्मी के रुप में आपस में आत्मिक एकता देखनी चाहिये। जब दूसरों के साथ झुल-मिल कर रहने तथा कार्य करने में कठ़िन लगे इसका अर्थ यह है कि अभी भी आप सांसारिक एवं मसीह में बच्चे ही हैं। परन्तु जैसे जैसे आत्मिक वृद्धि होती है, वैसे वैसे एकता, मेल, स्वतंत्रता, शान्ति आती है। और याद रखें कि यह आत्मिक एकता है, सांसारिक  एकता नहीं। जिन्होंने परमेश्वर को नहीं देखा, और जो परमेश्वर का उद्देश्य एवं ईरादा जानते नहीं, वे आपके साथ एक हो नहीं सकते। जो परमेश्वर को पहचानते हैं और जिनके अन्दर परमेश्वर का आत्मा वास करता है वे आपके साथ कार्य कर सकते हैं। चारों जीवधारियों का सीधा जाना अनन्त जीवन को दर्शाता है। वे पीछे हट नहीं सकते परन्तु केवल आगे ही बढ़ते थे। जैसे जैसे हम परमेश्वर के साथ आगे बढ़ते हैं वैसे वैसे व्यवस्थित वृद्धि होती हैं।

0 Response to " “उनके पंख एक दूसरे से परस्पर मिले हुए थे; वे अपने अपने साम्हने सीधे ही चलते हुए मुड़ते नहीं थे।” (येहजकेल १: ९)"

Post a Comment

Iklan Atas Artikel

Iklan Tengah Artikel 1

Iklan Tengah Artikel 2

Iklan Bawah Artikel