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“यहोवा के भवन के आँगनों... कोठरियों... भण्डारों के... जो... जो... नमूने ईश्वर के आत्मा की प्रेरणा से उसको मिले थे, वे सब दे दिये।” (१ इतिहास २८:१२)


 “यहोवा के भवन के आँगनों... कोठरियों... भण्डारों के... जो... जो... नमूने ईश्वर के आत्मा की प्रेरणा से उसको मिले थे, वे सब दे दिये।” (१ इतिहास २८:१२)



      दाऊद को अपने मंदिर का स्थान प्रगट करने के पश्चात् परमेश्वर ने मंदिर का नमूना उसे लिखितरुप में दिया। विश्वासी होने के नाते हम सबके लिये परमेश्वर का स्वर्गीय नमूना है और वह चाहता है कि हम उस नमूने को खोजे।


      कई लोग जानते नहीं कि परमेश्वर ने उनके जीवन के लिये कौन-सी योजना बनाई हैं। वे अनिश्चितता में जीते हैं और परमेश्वर की योजना और इच्छा के ज्ञान बगैर यहाँ वहाँ जाते हैं और इस प्रकार भारी नुकशान उठ़ाते हैं। परन्तु हम सबके लिये व्यक्तिगत, पारिवारिक और कलीसियाई जीवन के लिये स्वर्गीय योजना हैं। परमेश्वर के संतों के द्वारा हम उसकी योजना विशेष आसानी के साथ खोज सकते हैं। जो परमेश्वर के घर से दूर रहते हैं उन्हें परमेश्वर की योजना को जानना बहुत ही कठ़िन लगेगा। यदि आप केवल संदेश सुनने के लिये ही परमेश्वर के घर में आते हों तो संदेश आपको बहुत ही रसप्रद लगे तो भी आप परमेश्वर की योजना जान नहीं सकेंगे। परमेश्वर के लोगों के साथ पूर्ण संगति में रहना और परमेश्वर के साथ घनिष्ट सम्बन्ध बनाये रखना, ये दो सबक (पाठ) जब तक नहीं सीखेंगे तब तक परमेश्वर आपको स्वर्गीय योजना दे नहीं सकेगा। ये दोंनो संगति को बनाये रखने के द्वारा परमेश्वर आपके समक्ष रोज व रोज, हर महिने, हर साल अपनी योजना प्रगट करेगा। प्रतिदिन परमेश्वर की योजना प्रगट होते हुये देखने में और पालन करने में महा आनन्द आता है। तब हम आनन्दपूर्वक कहते हैं ‘मैं जानता हूँ परमेश्वर आज मुझको यहाँ रखना चाहता हैं। मैं जानता हूँ परमेश्वर ने मुझे यहाँ रखा हैं। मैं जानता हूँ परमेश्वर मुझसे कहता है कि ‘आज यहाँ, कल वहाँ जा।’ केवल कोई कोई वक्त ही नहीं पर हर रोज हमें इसी रीति से सच्चाई से कह सकना चाहिये। याद रखिये, दाऊद सम्पूर्ण रीति से टूट गया इसके बाद ही परमेश्वर ने उसे अपना स्वर्गीय नमूना दिया।

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